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व्याख्या: 'लखनवी अंदाज़' प्रसिद्ध कथाकार यशपाल जी द्वारा लिखा गया एक व्यंग्य निबंध है।
2. लेखक ने सेकंड क्लास का टिकट क्यों खरीदा था?
A. एकांत में नई कहानी के बारे में सोचने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए
B. पैसे बचाने के लिए
C. फर्स्ट क्लास में जगह न होने के कारण
D. नवाब साहब से मिलने के लिए
उत्तर: A. एकांत में नई कहानी के बारे में सोचने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देखने के लिए
व्याख्या: लेखक को पास के ही स्टेशन जाना था, और वे एकांत में चिंतन करते हुए खिड़की के बाहर के दृश्य का आनंद लेना चाहते थे।
3. ट्रेन के डिब्बे में लेखक को कौन बैठा मिला?
A. लखनऊ के एक नवाब नस्ल के सफेदपोश सज्जन
B. एक साधारण किसान
C. एक व्यापारी
D. एक सिपाही
उत्तर: A. लखनऊ के एक नवाब नस्ल के सफेदपोश सज्जन
व्याख्या: डिब्बे में बर्ड बर्थ पर लखनऊ की नवाब नस्ल के एक सफेदपोश सज्जन पालथी मारे बैठे थे।
4. नवाब साहब के सामने तौलिए पर क्या रखा था?
A. दो ताजे, चिकने खीरे
B. सेब और अंगूर
C. मिठाइयाँ
D. नमकीन की पुड़िया
उत्तर: A. दो ताजे, चिकने खीरे
व्याख्या: नवाब साहब के सामने तौलिए पर दो ताजे और चिकने खीरे रखे हुए थे।
5. लेखक के डिब्बे में आने पर नवाब साहब के चेहरे पर क्या भाव उभरे?
A. असंतोष और एकांत चिंतन में विघ्न का भाव
B. अत्यधिक खुशी
C. आश्चर्य और कौतूहल
D. गुस्सा और आक्रोश
उत्तर: A. असंतोष और एकांत चिंतन में विघ्न का भाव
व्याख्या: लेखक के अचानक आ जाने से नवाब साहब के चेहरे पर एकांत भंग होने का असंतोष दिखाई दिया।
6. नवाब साहब ने खीरे खाने से पहले क्या किया?
A. खीरों को धोया, पोछा, सिरे काटे, झाग निकाला और करीने से फाँकें काटकर जीरा-नमक छिड़का
B. सीधे छीलकर खाने लगे
C. लेखक को दे दिया
D. उन्हें बिना धोए काट लिया
उत्तर: A. खीरों को धोया, पोछा, सिरे काटे, झाग निकाला और करीने से फाँकें काटकर जीरा-नमक छिड़का
व्याख्या: नवाब साहब ने खीरे को खिड़की से बाहर धोया, पोछा, काटा और जीरा-मिला नमक व मिर्च उस पर बुरक दी।
7. लेखक ने पहली बार नवाब साहब के पूछने पर खीरा खाने से इंकार क्यों कर दिया?
A. अपने आत्मसम्मान को बनाए रखने के लिए
B. क्योंकि उन्हें खीरा पसंद नहीं था
C. क्योंकि उनका पेट भरा हुआ था
D. नवाब साहब के डर से
उत्तर: A. अपने आत्मसम्मान को बनाए रखने के लिए
व्याख्या: नवाब साहब ने शुरुआत में लेखक की उपेक्षा की थी, इसलिए लेखक ने अपने स्वाभिमान की रक्षा हेतु 'शुक्रिया' कहकर मना कर दिया।
8. नवाब साहब ने खीरे की फाँकों का क्या किया?
A. सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक दिया
B. लेखक को खिला दिया
C. मजे से खा गए
D. तौलिए में बाँधकर रख लिया
उत्तर: A. सूँघकर खिड़की से बाहर फेंक दिया
व्याख्या: नवाब साहब ने खीरे की प्रत्येक फाँक को नाक के पास ले जाकर सूंघा और रसास्वादन कर खिड़की के बाहर फेंक दिया।
9. खीरे की फाँकों को खिड़की से बाहर फेंकने के बाद नवाब साहब ने क्या किया?
A. तौलिए से हाथ-होंठ पोछे और डकार ली
B. लेखक से माफी माँगी
C. सो गए
D. पानी पिया
उत्तर: A. तौलिए से हाथ-होंठ पोछे और डकार ली
व्याख्या: उन्होंने गुलाबी आँखों से लेखक की ओर देखा, तौलिए से हाथ-होंठ पोछे और मानों पेट भर जाने की तृप्ति से डकार ली।
10. नवाब साहब के अनुसार खीरा कैसा होता है?
A. लज़ीज़ होता है लेकिन सक़ील (भारी) होने के कारण मैदा पर बोझ डाल देता है
B. सेहत के लिए हानिकारक होता है
C. बहुत मीठा होता है
D. सुपाच्य होता है
उत्तर: A. लज़ीज़ होता है लेकिन सक़ील (भारी) होने के कारण मैदा पर बोझ डाल देता है
व्याख्या: नवाब साहब ने कहा कि खीरा स्वादिष्ट तो होता है, पर आसानी से पचता नहीं और पेट पर भारी पड़ता है।
11. 'ज्ञानचक्षु खुल गए' से लेखक का क्या तात्पर्य है?
A. यह समझ आना कि बिना विचार और पात्रों के भी कहानी लिखी जा सकती है (व्यंग्य रूप में)
B. ईश्वर का ज्ञान प्राप्त होना
C. नवाबों के बारे में पूरी सच्चाई पता चलना
D. आँखें ठीक हो जाना
उत्तर: A. यह समझ आना कि बिना विचार और पात्रों के भी कहानी लिखी जा सकती है (व्यंग्य रूप में)
व्याख्या: लेखक ने सोचा कि जब बिना खाए केवल सूँघने से पेट भर सकता है, तो बिना विचार, घटना और पात्रों के कहानी भी लिखी जा सकती है।
12. लेखक ने 'लखनवी अंदाज़' पाठ के माध्यम से किस वर्ग पर व्यंग्य किया है?
A. पतनशील सामंती और दिखावटी नवाबी संस्कृति पर
B. किसानों पर
C. व्यापारी वर्ग पर
D. आम यात्रियों पर
उत्तर: A. पतनशील सामंती और दिखावटी नवाबी संस्कृति पर
व्याख्या: यह पाठ उस सामंती वर्ग पर करारा कटाक्ष है जो वास्तविकता से दूर झूठी शान और दिखावे की जिंदगी जीता है।
13. नवाब साहब ने खिड़की से बाहर देखकर क्या किया?
A. गहरा दीर्घ निश्वास लिया और खीरा बाहर फेंक दिया
B. लोगों को आवाज दी
C. दृश्य का चित्र बनाया
D. लेखक को बाहर देखने को कहा
उत्तर: A. गहरा दीर्घ निश्वास लिया और खीरा बाहर फेंक दिया
व्याख्या: नवाब साहब ने खीरे की फाँक को सूंघा, आँखें मूँद लीं और दीर्घ निश्वास लेकर उसे बाहर छोड़ दिया।
14. नवाब साहब का खीरे का इस्तेमाल करने का यह तरीका क्या कहलाता था?
A. नफासत, नजाकत और सूक्ष्म तरीका
B. व्यावहारिक तरीका
C. कंजूसी का तरीका
D. मूर्खतापूर्ण तरीका
उत्तर: A. नफासत, नजाकत और सूक्ष्म तरीका
व्याख्या: लेखक कहते हैं कि यह खीरा इस्तेमाल करने का एक काल्पनिक, नफीस और नज़ाकत भरा तरीका जरूर कहा जा सकता है।
15. 'सक़ील' शब्द का अर्थ क्या है?
A. आसानी से न पचने वाला (भारी)
B. स्वादिष्ट
C. कोमल
D. सस्ता
उत्तर: A. आसानी से न पचने वाला (भारी)
व्याख्या: उर्दू में 'सक़ील' का अर्थ गरिष्ठ या देर से पचने वाला पदार्थ होता है।
16. 'मैदा' शब्द का पाठ के संदर्भ में क्या अर्थ है?
A. आमाशय / पेट
B. आटा
C. दिमाग
D. दिल
उत्तर: A. आमाशय / पेट
व्याख्या: यहाँ 'मैदा' शब्द आमाशय यानी पाचन तंत्र/पेट के लिए प्रयुक्त हुआ है।
17. नवाब साहब के द्वारा खीरा खाने की पूरी प्रक्रिया में कौन-सा मुख्य भाव छिपा था?
A. अपनी नवाबी और रईसी का प्रदर्शन करना
B. लेखक के प्रति आदर
C. भूख मिटाने की तीव्र इच्छा
D. समय व्यतीत करना
उत्तर: A. अपनी नवाबी और रईसी का प्रदर्शन करना
व्याख्या: नवाब साहब आम लोगों की तरह खीरा खाते हुए नहीं दिखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने यह कृत्रिम और दिखावटी नाटक किया।
18. 'कनखियों से देखना' मुहावरे का क्या अर्थ है?
A. तिरछी नजरों से देखना
B. घूर कर देखना
C. आँखें बंद करके देखना
D. सीधे देखना
उत्तर: A. तिरछी नजरों से देखना
व्याख्या: लेखक नवाब साहब की गतिविधियों को छिपकर यानी 'कनखियों से' (तिरछी नजर से) देख रहे थे।
19. यशपाल का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
A. सन् 1903 में फिरोजपुर छावनी (पंजाब) में
B. सन् 1905 में वाराणसी में
C. सन् 1911 में अल्मोड़ा में
D. सन् 1920 में लखनऊ में
उत्तर: A. सन् 1903 में फिरोजपुर छावनी (पंजाब) में
व्याख्या: कथाकार यशपाल जी का जन्म पंजाब के फिरोजपुर छावनी में वर्ष 1903 में हुआ था।
20. यशपाल जी का कौन-सा उपन्यास स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन की विभीषिका पर आधारित है?
A. झूठा सच
B. अमिता
C. दिव्या
D. मेरी तेरी उसकी बात
उत्तर: A. झूठा सच
व्याख्या: 'झूठा सच' यशपाल जी का भारत-विभाजन की त्रासदी पर लिखा गया एक कालजयी उपन्यास है।
21. 'लखनवी अंदाज़' में नवाब साहब की कौन-सी आदत उजागर होती है?
A. बनावटी और ढोंगी जीवन शैली
B. सादगीपूर्ण जीवन
C. परोपकारी स्वभाव
D. देशभक्ति की भावना
उत्तर: A. बनावटी और ढोंगी जीवन शैली
व्याख्या: यह रचना नवाबों की वास्तविकता से परे केवल बाहरी दिखावे और आडंबरयुक्त जीवन शैली को दिखाती है।
22. नवाब साहब ने खीरे पर क्या-क्या छिड़का था?
A. जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च की पुड़िया
B. केवल नमक
C. चाट मसाला और नींबू
D. काली मिर्च
उत्तर: A. जीरा-मिला नमक और लाल मिर्च की पुड़िया
व्याख्या: उन्होंने करीने से कटी खीरे की फाँकों पर पीसा हुआ जीरा, नमक और लाल मिर्च छिड़की थी।
23. खीरे की फाँकों को देखकर लेखक के मुँह में क्या आ गया था?
A. पानी
B. कड़वाहट
C. थूक
D. कुछ नहीं
उत्तर: A. पानी
व्याख्या: नमक और मिर्च बुरके जाने से खीरे की रसीली फाँकें देखकर लेखक के मुँह में भी पानी आ रहा था।
24. 'किब्ला' शब्द का प्रयोग किसके लिए किया जाता है?
A. सम्मानसूचक संबोधन (जैसे- जनाब या महाशय)
B. मित्र के लिए
C. छोटे बच्चों के लिए
D. सेवक के लिए
उत्तर: A. सम्मानसूचक संबोधन (जैसे- जनाब या महाशय)
व्याख्या: उर्दू में 'किब्ला' एक आदरसूचक शब्द है जिसका प्रयोग बड़े या सम्मानित व्यक्ति को संबोधित करने के लिए होता है।
25. लेखक के अनुसार क्या बिना पात्रों, घटना और विचार के कहानी लिखी जा सकती है?
A. नहीं, यह केवल एक व्यंग्यात्मक सोच है
B. हाँ, आसानी से लिखी जा सकती है
C. केवल कविता लिखी जा सकती है
D. कुछ कह नहीं सकते
उत्तर: A. नहीं, यह केवल एक व्यंग्यात्मक सोच है
व्याख्या: लेखक का वास्तविक मानना है कि जिस प्रकार बिना खाए पेट नहीं भर सकता, उसी प्रकार बिना कथ्य, पात्र और विचार के कहानी नहीं बन सकती। यह केवल 'नयी कहानी' के दौर के कुछ लेखकों पर व्यंग्य था।
26. 'सफेदपोश' शब्द का क्या अर्थ है?
A. भद्र या सम्भ्रान्त व्यक्ति (शरीफ इंसान)
B. सफेद कपड़े पहनने वाला डाकू
C. साधु महात्मा
D. गरीब आदमी
उत्तर: A. भद्र या सम्भ्रान्त व्यक्ति (शरीफ इंसान)
व्याख्या: 'सफेदपोश' का शाब्दिक अर्थ भले ही सफेद कपड़े पहनने वाला हो, पर इसका प्रयोग सम्भ्रान्त या भद्र पुरुष के लिए किया जाता है।
27. 'बुरक देना' शब्द का क्या अर्थ है?
A. छिड़कना
B. फेंक देना
C. मिला देना
D. छुपाना
उत्तर: A. छिड़कना
व्याख्या: नवाब साहब ने खीरे की फाँकों पर जीरा-नमक और मिर्च 'बुरक' (छिड़क) दी थी।
28. लेखक ने नवाब साहब की किस प्रवृत्ति को 'सूक्ष्म, नफीस और नज़ाकत' कहा है?
A. केवल सूँघकर पेट भरने के नाटक और खीरे को फेंकने को
B. खीरा धोने की कला को
C. उनके बोलने के अंदाज को
D. उनके पहनावे को
उत्तर: A. केवल सूँघकर पेट भरने के नाटक और खीरे को फेंकने को
व्याख्या: लेखक ने व्यंग्य करते हुए खीरे को खाए बिना केवल सूँघकर संतुष्ट होने की कला को 'नफीस और अमूर्त' तरीका कहा।
29. नवाब साहब ने खीरा खाने का आम तरीका क्यों नहीं अपनाया?
A. क्योंकि वे खुद को साधारण लोगों से अलग और श्रेष्ठ दिखाना चाहते थे
B. क्योंकि उनके पास दाँत नहीं थे
C. क्योंकि उन्हें खीरे से एलर्जी थी
D. क्योंकि खीरा कड़वा था
उत्तर: A. क्योंकि वे खुद को साधारण लोगों से अलग और श्रेष्ठ दिखाना चाहते थे
व्याख्या: आम जनता की तरह खीरा चबाकर खाना नवाब साहब की बनावटी रईसी और झूठी शान के खिलाफ था।
30. 'लखनवी अंदाज़' किस प्रकार की रचना है?
A. व्यंग्यात्मक निबंध
B. ऐतिहासिक कहानी
C. संस्मरण
D. यात्रा वृतांत
उत्तर: A. व्यंग्यात्मक निबंध
व्याख्या: यह रचना एक तीखा व्यंग्य (Satire) है जो समाज के दिखावटी वर्ग की पोल खोलती है।
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Quick revision tip
After the practice set, write down the question numbers you missed and revise only those concepts once more. This makes MCQ practice more useful than repeatedly attempting the same questions without reviewing mistakes.