NCERT Solutions for Class 10 Hindi Path-11: Sanskriti
'संस्कृति' भदंत आनंद कौसल्यायन द्वारा रचित एक वैचारिक निबंध है, जिसमें सभ्यता और संस्कृति के मध्य अंतर स्पष्ट करते हुए यह बताया गया है कि सच्ची संस्कृति मानव-कल्याण और नैतिक उन्नति में निहित होती है, न कि केवल भौतिक साधनों के संचय में।
पाठ का सार एवं मुख्य बिंदु
पाठ्यपुस्तक के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
प्रश्न: लेखक के अनुसार सभ्यता और संस्कृति में क्या मूल अंतर है?
उत्तर: लेखक के अनुसार सभ्यता का संबंध बाह्य साधनों और सुविधाओं (जैसे तकनीकी विकास, भौतिक संसाधन) से है, जबकि संस्कृति का संबंध मनुष्य की आंतरिक उन्नति, विवेक, तथा उन साधनों के उचित एवं परोपकारी उपयोग से है।
प्रश्न: लेखक 'क्रिया' और 'संस्कृति' के मध्य क्या संबंध बताते हैं?
उत्तर: लेखक बताते हैं कि प्रत्येक क्रिया संस्कार उत्पन्न करती है, और जब वे संस्कार समाज या मनुष्य के हित में उपयोग होते हैं, तभी वे 'संस्कृति' कहलाते हैं; यदि क्रिया का उद्देश्य केवल स्वार्थ या विनाश हो, तो वह संस्कृति नहीं मानी जा सकती।
प्रश्न: लेखक ने पाश्चात्य सभ्यता के अंधानुकरण पर क्या टिप्पणी की है?
उत्तर: लेखक ने स्पष्ट किया है कि पश्चिमी वेशभूषा, तकनीक या जीवनशैली अपनाना मात्र सभ्यता का प्रदर्शन है, न कि सच्ची संस्कृति; बिना विवेक के अंधानुकरण करने से मनुष्य केवल बाह्य रूप से आधुनिक बन सकता है, आंतरिक रूप से सुसंस्कृत नहीं।
प्रश्न: लेखक के अनुसार सच्ची संस्कृति का मापदंड क्या है?
उत्तर: लेखक के अनुसार सच्ची संस्कृति का मापदंड यह है कि मनुष्य अपने ज्ञान, शक्ति और साधनों का उपयोग समस्त मानवता के कल्याण और उन्नति के लिए करे, न कि केवल आत्म-स्वार्थ या विनाशकारी उद्देश्यों के लिए।